साइबर सिटी ने पिछले सर्वेक्षण में प्रदेश स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह 140वें पायदान पर खिसक गया था। यह गिरावट तब हुई थी जब सफाई व्यवस्था पर करीब ₹600 करोड़ खर्च किए गए थे, जिससे नगर निगम को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
गुरुग्राम में सफाई हमेशा एक बड़ा मुद्दा रही है, अक्सर कूड़े के ढेर और अनियमित सफाई की शिकायतें मिलती रही हैं। पिछले साल, एक सफाई एजेंसी के कारण कूड़ा उठाव भी प्रभावित हुआ था, जिसने शहर की स्वच्छ सर्वे रैंकिंग पर नकारात्मक असर डाला था।
क्या इस बार बदलेगी तस्वीर?
नगर निगम को भरोसा है कि इस बार शहर की रैंकिंग में सुधार होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस उम्मीद पर खरा उतरते हुए गुरुग्राम अपनी पिछली गिरावट से उबर पाता है।
पहली बार पांच श्रेणियों में मूल्यांकन
स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार शहरों को उनकी जनसंख्या के आधार पर पाँच अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
- बहुत छोटे शहर: 20,000 से कम जनसंख्या
- छोटे शहर: 20,000-50,000 जनसंख्या
- मध्यम शहर: 50,000-3 लाख जनसंख्या
- बड़े शहर: 3-10 लाख जनसंख्या
- बहुत बड़े शहर: 10 लाख से अधिक जनसंख्या
यह नया वर्गीकरण प्रत्येक शहर के आकार और विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। गुरुग्राम जिले में गुरुग्राम नगर निगम के साथ-साथ मानेसर नगर निगम, सोहना नगर परिषद, पटौदी और फर्रुखनगर की रैंकिंग भी जारी की जाएगी।
गुरुग्राम की अब तक की रैंकिंग पर एक नज़र: